उचित शिक्षा के महत्व

A slightly modified version of this piece has appeared previously in the Rajasthan Patrika newpaper, Jaipur, February 3, 2015. Click here for the original.

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कई संस्थानों में लर्निंग एंड डवलपमेंट प्रोफ़ेशनल्स ऐसी अनेक बातें सिखाते हैं, जो बेहटर प्रदर्शन में मददगार होती हैं, लेकिन इसके लिए सीखने वाले व्यक्ति को खुद भी लगातार अभ्यास कर्ना होता है । अभ्यास से ही हम समय के साथ-साथ उत्कृष्ट होकर पूर्ण रूप से विकसित होते हैं ।यहां महत्वपूर्ण है कि सीख्ने के प्रयास सही दिशा में हों । हमारे पूरे लर्निंग प्रोसेस का टर्गट आने वाले कल को बेहतर बनाने का होना चाहिये ।

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कतरा दरिया में मिल जाए तो दरिया हो जए, काम अच्छा वो जिसका मआल अच्छा हो

मिर्ज़ा गालिब की ये पंक्तियां कितनी सही है, कहा नहीं जा सकता । लेकिन यह सच है कि आज की सीखी हुई छोटी से छोटी बात भी हमारा भविष्य तय करती है । मनुष्य के आगे बढ़ने के लिए हर छोटे से छोटा प्रयास जरूरी होता है । क्या हम यह सोचते हैं कि अभिभावक, शिक्षक, प्रशिक्षक आदि ऐसे लोग जो हमारे अंतर्मन को प्रभावित कर हमें सीखने के लिए प्रेरित करते हैं । वे आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में सीखने के हरेक पहलू के महत्व के प्रति जागरूक हैं या नहीं । शायद इनमें से ज्यादातर ऐसे नहीं हैं । हमें अपने आसपास ठीक से देखने की जरूरत है । हम देख सकाते है कि कुछ अभिभवक बच्चों को अपनी तय सीमाओं में बांधे रखना चाहते हैं । जबकि कुछ कड़ी निगरानी में रखते हैं ।हम यह भी देखते हैं कि कुछ बच्चे अनौतिकता से भरे सागर में डूब जाते हैं । उनमें राष्ट्रीयता, मानवता और नागरिकता के प्रति अनादर का भाव ही होता है ।

दूसरी ओर्, हमें समाज के ठेकेदार कहलाने वाले उन नेताओं को तरफ़ भी देखना चाहिए, जो लोगों की मानसिकता रूपी रीढ़ की हड्डी को टुकड़ों में बांटने और उनके विकास को अवरुद्ध करने और उनके आगे बढ़्ने के अधिकार  को छीनने की कोशिश करते हैं । लोगों को यह समझना चाहिए कि खुशहाल जीवन के लिए आगे बढ़ना या विकसित होना पहली प्राथमिकता है ।

हमारे संस्थानों में सिखाने के तौर-तरीकों पर भी नजर डालें । लर्निंग एंड ड्वलपमेंट प्रोफ़ेशनल्स द्वारा कई बातें सिखाई जाती हैं । जिन्हें सीखकर व्यक्ति उनका प्रदर्शन करता है । बाद में खुद सीखने का अभ्यास भी करता है । इस तरह समय के साथ उत्कृष्ट होकर पूर्ण रूप से विकसित हो जाते हैं । लेकिन हमें समझना होगा कि गलत दिशा में सीखने के प्रयास करने और एकसाथ सीखने के क्रम में साथ चलने को दरकिनार कर हम कैसे आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हैं । समष्ट है कि मानव समाज में दोष हैं । समाज में जो होना चाहिए वह नहीं हो रहा है । निश्चित रूप से मनुष्य की समझ और उसके मानवीय मूल्यों की रूपरेखा गलत दिशा में है ।

हमें अभिभावक की भूमिका और जिम्मेदारी को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है । जो समाज को प्रशिक्षित करने-सिखाने का काम कर रहे हैं, चाहे वह शिक्षक हो, कोच हो, नेता हो, सभी की भूमिका फिर से परिभाषित होनी चाहिए । जीवनभर सीखते रहना न सिर्फ मनुष्य का अधिकार है, बल्कि उन लोगों का कर्तव्य भी है, जिन्हें समाज को बेहतर सिखाने का अधिकार दिया गया है । ऐसा भविष्य में भी लगातार होना चाहिए ।

क्योंकि कल बहने वाली नादियों में आज की बारिश की बूंदें ही होंगी । यानी आज जो काम अच्छा किया जएगा, वही आने वाले कल को बेहतर बनाने में हमारी मदद करेगा ।